Male Infertility: Symptoms, Diagnosis & Treatment

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Male Infertility: Symptoms, Diagnosis & Treatment

मेल इंफर्टिलिटी या पुरुष निःसंतानता क्या है?

आज कल इंफेर्टिलिटी या निःसंतानता की समस्या इतनी आम होती जा रही है कि तकरीबन 10 प्रतिशत वैवाहिक दम्पति इस समस्या से जूझ रहे हैं। पुरुषों में इंफेर्टिलिटी को इस प्रकार से परिभाषित किया जा सकता है कि यदि वो असुरक्षित सम्भोग करने के उपरांत भी बच्चे पैदा करने में असमर्थ हो। 
वाजिकर्ण (एंड्रोलोजी या नरविज्ञानं और यूजेनिक या सूजननकी ) को आयुर्वेद की सबसे महत्वपूर्ण शाखाओं में से एक बताया गया है । इसके अतिरिक्त एंड्रोलॉजी या नृविज्ञान या नर विज्ञानं का अभ्यास चरक संहिता , सुश्रुत संहिता में भी वर्णित है।


पुरुषों में नि:संतानता के क्या कारण है –
वैदिक आयुर्वेदिक पद्धति के अनुसार पुरुषों में नि:संतानता के अनेको कारण बताये गए है। आइये इसपर एक नज़र डालतें है। अत्यधिक यौन गतिविधियों में संलिप्त होना भी इसका एक कारण है। 
अव्यायामत – पुरुषों में आलस्य की प्रवृति भी इसका एक कारण है।
व्यायामत –  कुछ पुरुषों में जो की अत्यधिक शारीरिक और मानसिक श्रम करते है उनमें भी यह समस्या देखने को मिलती है।

असात्म्य अन्नम –  मसालेदार, नमकीन, जमे हुए-संरक्षित भोजन, कम पोषण आहार और ख़राब जीवनशैली के कारण से क्रोधी और पित्त दोहा हो सकता है जो की शुक्राणु की गुणवत्ता और मात्रा को प्रभावित करतें है। जिससे नि:संतानता उत्पन्न होती है। इसके अतिरिक्त भय, तनाव, तंग कपड़े, गर्म वातावरण में काम करना, धूम्रपान, शराब आदि भी पुरुषो में निःसंतानता के  कारण हैं और इन कारणों का उल्लेख तो चिकित्सा की आधुनिक प्रणाली में भी किया गया है। 
अतः यहाँ से एक बात तो स्पष्ट होती है कि अपने आस पास का वातावरण और खान पान का असर पुरुषों के प्रजनन क्षमता पर भी मुख्य रूप से पड़ता है। एक शोध के द्वारा ये भी पता चला है कि पर्यावरण में व्याप्त प्रदुषण, खानपान और जीवनशैली के कारण ही पुरुषों में निःसंतानता संबंधी समस्याओं में इजाफा हुआ है। 
वैसे तो ख़राब जीवन शैली के कारण पुरुषो में  निःसंतानता उत्पन्न होने के कई कारण बताये गए है परंतु यहाँ हमने कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला है।  जो की इस प्रकार से हैं

मानसिक तनाव – तनाव के दौरान स्वायत्त तंत्रिका तंत्र और अधिवृक्क हार्मोन पुरुषों में प्रजनन प्रणाली को प्रभावित करते हैं। अध्ययनों से पता चला है कि भावनात्मक तनाव पुरुषों में टेस्टोस्टेरॉन हार्मोन के स्तर को कम कर देतें है जिससे की जननांगों में शुक्राणु निर्माण की प्रक्रिया बाधित होती है

अंडकोश की थैली का अधिक तापमान – अंडकोश (SCROTUM ) का तापमान शरीर के तापमान से थोड़ा कम होता है जो की शुक्राणु निर्माण के लिए एक आदर्श स्थिति है। अधिक तापमान शुक्राणु जनन के लिए प्रतिकूल होतें है इसलिए पुरुषों में अंडकोश की स्थिति शरीर से थोड़ा बहार की तरफ होती है जिससे इसका तापमान शरीर के तापमान से कम बना रहे। वृषण क्षेत्र के तापमान में वृद्धि शुक्राणु निर्माण को प्रभावित करती है। 
इनके अतिरिक्त तंग फिटिंग के कपडे, अंडरवियर पहनना, उच्च तापमान में काम करना, बुखार इत्यादि वृषण के उचच तापमान के कारण बनते है जो की अन्ततः पुरुषो में नि:संतानता के उत्पन्न करतें हैं।
धूम्रपान (SMOKING) – ऐसा देखा गया है की जो पुरुष जरुरत से ज्यादा धूम्रपान करतें है उनमें यह समस्या उत्पन्न होने की  ज्यादा संभावनाये होती है। 

शराब का सेवन – शराब के सेवन से टेस्टोस्टेरोन के स्तर में कमी देखने को मिलती है जिसके परिणामस्वरूप पुरुषो में सेक्स करने की इच्छा ख़त्म हो जाती है। इनके साथ ही अत्याधिक एल्कोहलिक पदार्थो का सेवन शुक्राणुओं की गुणवत्ता और मात्रा को प्रभावित करता है।
एल्कोहल का सेवन करने से यकृत द्वारा विटामिन ए के उपापचय की दर पूर्णतः समाप्त हो जाती है और जिंक के अवशोषण की दर में कमी आती है।
अब चूंकि विटामिन ए शुक्राणुओं के विकास में आवश्यक है और जिंक की कमी शुक्राणुओं की संख्याओं में कमी का कारक है जो की एल्कोहॉल से सर्वाधिक प्रभावित होती है। अब ये तो साफ़ तौर पर कहा जा सकता है कि शराब किस हद तक प्रजनन स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है और यह पुरुषो में नपुंसकता का सबसे बड़े कारण के रूप में सामने आ रहा है। 

पुरुषो में निःसंतानता के लक्षण

पुरुषों में निःसंतानता का मुख्य लक्षण बच्चा पैदा करने में सक्षम न होके पाना ही है। अधिकांश पुरुष अपने नपुंसकता संबंधी उत्पन्न हो रहे लक्षणों को अनदेखा कर देतें है जो की इस प्रकार से है। 
1 – हार्मोन्स में होने वाले बदलाव के कारण स्खलन करने में सक्षम न हो पाना
2 अंडकोषों में दर्द और सूजन
3 हार्मोन असंतुलन के कारण सेक्स करने की इच्छाओ का समाप्त होना। 
इनके अतिरिक्त शुक्राणुओं या कम शुक्राणुओं की संख्या होना, अतीत में किसी भी अंडकोष-प्रोस्टेट या यौन समस्या से ग्रसित होना, कैंसर के उपचार से गुजरना और नि:संतानता की समस्या वाले किसी भी पारिवारिक इतिहास से संबंध इत्यादि।

पुरुषो में नपुंसकता के प्रकार
आयुर्वेद में पुरुष निःसंतानता के प्रकारों को संबंधित दोषों वात-पित्त-कफ के अनुसार वर्गीकृत किया जा सकता है। जैसे वातजा शुक्राडुष्टि, पित्तजा शुक्राडुष्टि, कफजा शुक्रा दुष्टि, सन्निताजा शुक्रादुश्ती।

पुरुष निःसंतानता की जाँच – 
स्वस्थ वीर्य की विशेषता तरल, मोटी, भारी, मीठी, बिना किसी भी दुर्गंध की होती है । चिपचिपा, सफ़ेद रंग ही स्वस्थ वीर्य की पहचान है । इसके साथ ही इसकी तरलता शहद और शीशम के तेल की तरह होती है। 
अब जहाँ तक बात है आयुर्वेद में वर्णित वीर्य की पैथोलॉजिकल स्थितियों की तो इसके अनुसार  झागदार, पतली, सूखी, फीकी, हाइपर चिपचिपी, पायरोस्पर्मिया, नॉन लिक्विफैक्शन, कम मात्रा, मूत्र / मल जैसी बदबू और ऊतक घटको के साथ इसका स्त्रावण को ही ख़राब वीर्य की संज्ञा दी गयी है
परंतु यहाँ यह बात ध्यान रहे की आधुनिक चिकित्सा और तकनीक की मदद से पुरुषो के वीर्य सम्बंधी समस्याओं के निदान संभव हैं। जो की निम्न पद्धतियों का अनुशरण कराती है। 
सामान्य शारीरिक परीक्षा, वीर्य विश्लेषण, अंडकोषीय अल्ट्रासाउंड, हार्मोन परीक्षण, स्खलन यूरिनलिसिस, आनुवंशिक परीक्षण, अंडकोष बायोप्सी, शुक्राणु कार्य परीक्षण और ट्रांस-रेक्टल अल्ट्रासाउंड है।

पुरुष नपुंसकता के  उपचार – अब जहाँ तक बात की जाए वर्तमान समय में आधुनिक विज्ञान में पुरुष नपुंसकता के लिए कोई विशिष्ट उपचार नहीं है। उपलब्ध चिकित्सा उपचार महंगा है, उपयोग करने में आसान नहीं है, कुशल नहीं है और इसके दुष्प्रभाव भी हैं। इसलिए पुरुष नि:संतानता के लिए आयुर्वेदिक दवाओं की माँगो में तेजी से इजाफा हुआ है। 

आयुर्वेद एक प्राचीन विज्ञान है जो कि स्वस्थ आहार और जीवन शैली पर जोर देता है। शुक्राणु गतिशीलता के लिए या किसी भी निःसंतानता के कारक के लिए आयुर्वेदिक दवा, विषाक्तता को दूर करने और दोषों को संतुलत करने के काम आती है। 
आयुर्वेद के प्राचीन अध्यायों में वर्णित ऐसे कई आचारों का उल्लेख किया गया है, जिनका पालन करने से व्यक्ति ख़राब जीवनशैली से होने वाली अनेको बीमारियों से बच सकता है।
जो की इस प्रकार से है।
1 दिनचर्या
2 ऋतुचर्या
3 रात्रिचर्या
4 थेरोपस्थम्बा पालन (Thrayopas thamba)
5 सद्वृत्त –  (सद्वृत्त)
6 आचार रसायन – 
7 अष्ठांग योग – 

पुरुष बांझपन के लिए आयुर्वेदिक उपचार में पंचकर्म चिकित्सा की महत्वपूर्ण भूमिका है। जिसे  3 प्रमुख चरणों में वर्गीकृत किया गया है और आगे उप वर्गीकृत किया गया है।

1 – प्रारंभिक उपचार –  पंचकर्म के पहले चरण में  जलोदर और सूंड शामिल हैं
2 – मुख्य उपचार- इस चरण में  अरंडी के तेल और दूध के साथ विरेचन शामिल हैं। स्नेहा बस्ती यानी तेल एनीमा भी इनमे शामिल है।
बस्ती, यापना विस्ति (कायाकल्प एनीमा जिसे लंबे समय तक बिना किसी प्रतिकूल प्रभाव के इस्तेमाल किया जा सकता है), यूटारा विस्टा यानि एनीमा को मूत्रमार्ग छिद्र या योनि के माध्यम से प्रवेश कराया जाता है। 
मुख्य उपचार के बाद प्रबंधन– मुख्य उपचार के उपरांत चरक संहिता में वाजीकरण औषधियों ( दवाइयाँ और जड़ी-बूटिया) का उल्लेख किया गया है। जो की पुरुषो में  वज्रकारण और शुक्राणु प्रयोजन के लिए इस्तेमाल की जाती हैं-
कपिकच्छु – यह कम शुक्राणु गतिशीलता के लिए आयुर्वेदिक उपचार में उपयोग किया जाता है और शुक्राणुओँ की मात्रा  को बढता है। यह महिलाओं में भी ovulation regularizes और पुरुष और महिला बाँझपन को रोकने में मदद करता है। इसके अलावा, जड़ी बूटी एक शांतिदायक दवा टॉनिक के रूप में कार्य करता है।
गोक्षुरा–  टेस्टोस्टेरोन (पुरुष हार्मोन) के स्तर को बढ़ाता है।
*अश्वगंधा– यह शुक्राणुजनन को बढ़ाता है।
*शतावरी– यह ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने और फर्टिलिटी को बढ़ाने में मदद करता है।
*यष्टिमधु – वीर्य की गुणवत्ता में सुधार करता है।
इन सब के अतिरिक्त आयुर्वेद में अन्य दवाइयां भी बताई गयी है जिसे डॉक्टर के परामर्श के बाद लिया जा सकता है जो की इस प्रकार से हैं।।
शिलाजीत रसायण, अभ्रक भस्म, सुकुमार घृत, अग्नितुंडि वटी, अश्वगंधा घृतम, च्यवनप्राश, दशमूलारिष्टम्, चन्द्र प्रभा वटी आदि। 
इसके अलावा शुक्राणुओं की शुद्धि में मदद करने वाली आयुर्वेदिक औषधियाँ हैं कुष्ट, कत्थाला, समुद्रा फेन, वसुका, इक्षु आदि।
 साथ ही शुक्राणु निर्माण के संदर्भ में फायदेमंद आयुर्वेदिक दवाइयाँ इस प्रकार से हैं जिवाका, काकोली, क्षीरककोली, मेदा आदि।
 ऐसी दवाएँ उचित मात्रा के साथ और पुरुष निःसंतानता विशेषज्ञ से परामर्श के बाद ही दी जानी चाहिए।
विशेषज्ञ की राय है कि दवाओं और जड़ी बूटियों के अलावा योगाभ्यास और मेडिटेशन भी इस समस्या से उबरने में लाभकारी सिद्ध होता है। योग के ये आसान योग  वॉल पोज़, आसान पोज़, रिक्लाइनिंग बाउंड एंगल फर्टिलिटी बढ़ाने में मददगार साबित होते हैं।

पुरुषो की प्रजनन क्षमता बढ़ाने हेतु प्राकृतिक उपाय –
आयुर्वेद प्राकृतिक रूप से किसी बीमारी के इलाज पर जोर देता है। पुरुष प्रजनन क्षमता के लिए प्राकृतिक उपचार का उद्देश्य शुक्राणु की मात्रा में वृद्धि, गुणवत्ता में सुधार और पुरुष प्रजनन स्वास्थ्य में सुधार करना है। पुरुष प्रजनन प्रणाली के उचित कार्यान्वयन के लिए, आवश्यक खनिज और विटामिन के साथ उचित आहार बहुत महत्वपूर्ण है।


पुरुषो में प्रजनन क्षमता बढ़ाने हेतु आहार में जैविक फल और सब्जियां, साबुत अनाज, फलियां, नट, मछली और बीज आदि शामिल करना चाहिए। 


जितना हो सके तेलयुक्त,  डिब्बे बंद खाद्य, संतृप्त वसा  और हाइड्रोजनीकृत तेलों से बने पदार्थो के सेवन से बचे। 
कद्दू के बीजों में आवश्यक फैटी एसिड के साथ उच्च जस्ता होता है, जो पुरुष प्रॉडक्टिव हार्मोन के कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
खनिज और विटामिन्स जैसे vitamin B-12, C, E और flaxseed oil, zinc, coenzyme Q 10 आदिे शुक्राणुओं की संख्या और गतिशीलता को बढ़ाने में मदद करतें है। अतः इन सभी से सम्बंधित खाद्य पदार्थो को अपने आहार में शामिल करें।


इनके साथ ही उच्च गुणवत्ता की हर्बल दवाओं ने पुरुषो में  नपुंसकता के इलाज को संभव कर दिखाया है। 
वर्तमान समय में आधुनिक चिकित्सा की जो प्रणाली प्रचलित है उसमें अधिक लागत और दोष होते होते है। इसके कई दुष्प्रभाव भी बाद में देखने को मिलते है यहीं कारण है कि आज के समय में  हजारो हजार नि:संतानता से ग्रसित दंपत्तियों का रुझान आयुर्वेद की तरफ हुआ है। जो की पूर्णतः प्राकृतिक चिकित्सा प्रणाली और जड़ी बूटियों पर आधारित हैं। 


आयुर्वेद में पुरुष निःसंतानता के उपचार की लागत का मूल्य वर्तमान में प्रचिलित दवाओं से कहीं कम है और इसका कोई दुष्प्रभाव भी देखने को नही मिलतां है। इसके अलावा पुरुष नि:संतानता के लिए आयुर्वेदिक उपचार महत्वपूर्ण परिणाम देने वाला सिद्ध हुआ है।

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